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Tuesday, February 9, 2021

What is Sanatan Dharam

What is Sanatan Dharam

सनातन धर्म क्या है?

‘सनातन’ का अर्थ है – शाश्वत या ‘हमेशा बना रहने वाला’, अर्थात् जिसका न आदि है न अन्त।सनातन धर्म मूलत: भारतीय धर्म है, जो किसी ज़माने में पूरे वृहत्तर भारत तक व्याप्त रहा है

, जिस बातों का शाश्वत महत्व हो वही सनातन कही गई है, जैसे सत्य सनातन है, ईश्वर ही सत्य है, आत्मा ही सत्य है, मोक्ष ही सत्य है और इस सत्य के मार्ग को बताने वाला धर्म ही सनातन धर्म भी सत्य है, वह सत्य जो अनादि काल से चला आ रहा है और जिसका कभी भी अंत नहीं होगा वह ही सनातन या शाश्वत है, जिनका न प्रारंभ है और जिनका न अंत है उस सत्य को ही सनातन कहते हैं, यही सनातन धर्म का सत्य है।

मित्रों, ध्यान से पढ़े, ऎसी प्रस्तुतियां बहुत कम पढ़ने को मिलती हैं, वैदिक या हिंदू धर्म को इसलिये सनातन धर्म कहा जाता है, क्योंकि? यही एकमात्र धर्म है जो ईश्वर, आत्मा और मोक्ष को तत्व और ध्यान से जानने का मार्ग बताता है, आप ऐसा भी कह सकते हो कि मोक्ष का कांसेप्ट इसी धर्म की देन हैं, एकनिष्ठता, योग, ध्यान, मौन और तप सहित यम-नियम के अभ्यास और जागरण मोक्ष का मार्ग है, अन्य कोई मोक्ष का मार्ग नहीं है, मोक्ष से ही आत्मज्ञान और ईश्वर का ज्ञान होता है, यही सनातन धर्म का सत्य है।

सनातन धर्म के मूल तत्व सत्य, अहिंसा, दया, क्षमा, दान, जप, तप, यम-नियम हैं जिनका शाश्वत महत्व है, अन्य प्रमुख धर्मों के उदय के पूर्व वेदों में इन सिद्धान्तों को प्रतिपादित कर दिया गया था- “असतो मा सदगमय, तमसो मा ज्योर्तिगमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय” यानी हे ईश्वर, मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलो, अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो, मृत्यु से अमृत की ओर ले चलो।



जो लोग उस परम तत्व परब्रह्म परमेश्वर को नहीं मानते हैं वे असत्य में गिरते हैं, असत्य से जीव मृत्युकाल में अनंत अंधकार में पड़ जाता हैं, उनके जीवन की गाथा भ्रम और भटकाव की ही गाथा सिद्ध होती है, वे कभी अमृत्व को प्राप्त नहीं होते, मृत्यु आये इससे पहले ही सनातन धर्म के सत्य मार्ग पर आ जाने में ही भलाई है, अन्यथा अनंत योनियों में भटकने के बाद प्रलयकाल के अंधकार में पड़े रहना पड़ता है।

पूर्णमद: पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते।।

सत्य सत् और तत् से मिलकर बना है, सत का अर्थ यह और तत का अर्थ वह, दोनों ही सत्य है, “अहं ब्रह्मास्मी और तत्वमसि” यानी मैं ही ब्रह्म हूँ और तुम भी ब्रह्म हो, यह संपूर्ण जगत ब्रह्ममय है, ब्रह्म पूर्ण है, यह जगत् भी पूर्ण है, पूर्ण जगत् की उत्पत्ति पूर्ण ब्रह्म से हुई है, पूर्ण ब्रह्म से पूर्ण जगत् की उत्पत्ति होने पर भी ब्रह्म की पूर्णता में कोई न्यूनता नहीं आती, वह शेष रूप में भी पूर्ण ही रहता है, यही सनातन सत्य है।

जो तत्व सदा, सर्वदा, निर्लेप, निरंजन, निर्विकार और सदैव स्वरूप में स्थित रहता है उसे सनातन या शाश्वत सत्य कहते हैं, वेदों का ब्रह्म और गीता का स्थितप्रज्ञ ही शाश्वत सत्य है, जड़, प्राण, मन, आत्मा और ब्रह्म शाश्वत सत्य की श्रेणी में आते हैं, सृष्टि व ईश्वर (ब्रह्म) अनादि, अनंत, सनातन और सर्वविभु हैं।

जड़ पाँच तत्व से दृश्यमान है- आकाश, वायु, जल, अग्नि और पृथ्वी, यह सभी शाश्वत सत्य की श्रेणी में आते हैं, यह अपना रूप बदलते रहते हैं किंतु समाप्त नहीं होते, प्राण की भी अपनी अवस्थायें हैं, प्राण, अपान, समान और यम, उसी तरह आत्मा की अवस्थायें हैं- जाग्रत, स्वप्न, सुसुप्ति और तुर्या।

ज्ञानी लोग ब्रह्म को निर्गुण और सगुण कहते हैं, उक्त सारे भेद तब तक विद्यमान रहते हैं जब तक ‍कि आत्मा मोक्ष प्राप्त न कर ले, यही सनातन धर्म का सत्य है, ब्रह्म महाआकाश है तो आत्मा घटाकाश, आत्मा का मोक्ष परायण हो जाना ही ब्रह्म में लीन हो जाना है, इसीलिये भाई-बहनों, कहते हैं कि ब्रह्म सत्य है, और जगत मिथ्‍या, यही सनातन सत्य है और इस शाश्वत सत्य को जानने या मानने वाला ही सनातनी कहलाता है।

विज्ञान जब प्रत्येक वस्तु, विचार और तत्व का मूल्यांकन करता है तो इस प्रक्रिया में धर्म के अनेक विश्वास और सिद्धांत धराशायी हो जाते हैं, विज्ञान भी सनातन सत्य को पकड़ने में अभी तक कामयाब नहीं हुआ है किंतु वेदांत में उल्लेखित जिस सनातन सत्य की महिमा का वर्णन किया गया है, विज्ञान धीरे-धीरे उससे सहमत होता नजर आ रहा है।

हमारे ऋषि-मुनियों ने ध्यान और मोक्ष की गहरी अवस्था में ब्रह्म, ब्रह्मांड और आत्मा के रहस्य को जानकर उसे स्पष्ट तौर पर व्यक्त किया था, वेदों में ही सर्वप्रथम ब्रह्म और ब्रह्मांड के रहस्य पर से पर्दा हटाकर ‘मोक्ष’ की धारणा को प्रतिपादित कर उसके महत्व को समझाया गया था, मोक्ष के बगैर आत्मा की कोई गति नहीं इसीलिये ऋषियों ने मोक्ष के मार्ग को ही सनातन मार्ग माना है।

धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष में मोक्ष अंतिम लक्ष्य है, यम, नियम, अभ्यास और जागरण से ही मोक्ष मार्ग पुष्ट होता है, जन्म और मृत्यु मिथ्‍या है, जगत भ्रमपूर्ण है, ब्रह्म और मोक्ष ही सत्य है, मोक्ष से ही ब्रह्म हुआ जा सकता है, इसके अलावा स्वयं के अस्तित्व को कायम करने का कोई उपाय नहीं, ब्रह्म के प्रति ही समर्पित रहने वाले को ब्राह्मण और ब्रह्म को जानने वाले को ब्रह्मर्षि और ब्रह्म को जानकर ब्रह्ममय हो जाने वाले को ही ब्रह्मलीन कहते हैं।

सनातन धर्म के सत्य को जन्म देने वाले अलग-अलग काल में अनेक ऋषि हुयें हैं, उक्त ऋषियों को दृष्टा कहा जाता है, अर्थात जिन्होंने सत्य को जैसा देखा, वैसा कहा, इसीलिये सभी ऋषियों की बातों में एकरूपता है, और जो ऋषियों की बातों को नहीं समझ पाते वही उसमें भेद करते हैं, भेद भाषाओं में होता है, अनुवादकों में होता है, संस्कृतियों में होता है, परम्पराओं में होता है, सिद्धांतों में होता है, लेकिन सत्य में नहीं।

वेद कहते हैं ईश्वर अजन्मा है, उसे जन्म लेने की आवश्यकता नहीं, उसने कभी जन्म नहीं लिया और वह कभी जन्म नहीं लेगा, ईश्वर तो एक ही है यही सनातन सत्य हैं, सत्य को धारण करने के लिये प्रात: योग और प्राणायाम करें तथा दिनभर कर्मयोग करें, वेद-पुराणों को समझे, गौ माता और ब्राह्मण को सम्मान दें, ऋषि परंपराओं को जीवन में अपनायें, सज्जनों, यही सनातनी जीवन हैं।

हरि ओऊम् तत्सत् जय श्री लक्ष्मीनारायण!

Monday, February 8, 2021

सनातन धर्म की कुछ बाते जो कोई नहीं बताएगा :-

सनातन धर्म की कुछ बाते जो कोई नहीं बताएगा :- कृपया अपने बच्चो को जरूर बताये
काष्ठा = सैकन्ड का 34000 वाँ भाग
1 त्रुटि = सैकन्ड का 300 वाँ भाग
2 त्रुटि = 1 लव ,
1 लव = 1 क्षण
30 क्षण = 1 विपल ,
60 विपल = 1 पल
60 पल = 1 घड़ी (24 मिनट ) ,
2.5 घड़ी = 1 होरा (घन्टा )
24 होरा = 1 दिवस (दिन या वार) ,
7 दिवस = 1 सप्ताह
4 सप्ताह = 1 माह ,
2 माह = 1 ऋतू
6 ऋतू = 1 वर्ष ,
100 वर्ष = 1 शताब्दी
10 शताब्दी = 1 सहस्राब्दी ,
432 सहस्राब्दी = 1 युग
2 युग = 1 द्वापर युग ,
3 युग = 1 त्रैता युग ,
4 युग = सतयुग
सतयुग + त्रेतायुग + द्वापरयुग + कलियुग = 1 महायुग
72 महायुग = मनवन्तर ,
1000 महायुग = 1 कल्प
1 नित्य प्रलय = 1 महायुग (धरती पर जीवन अन्त और फिर आरम्भ )
1 नैमितिका प्रलय = 1 कल्प ।(देवों का अन्त और जन्म )
महालय = 730 कल्प ।(ब्राह्मा का अन्त और जन्म )



दो लिंग : नर और नारी
दो पक्ष : शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष
दो पूजा : वैदिकी और तांत्रिकी (पुराणोक्त)
दो आयन : उत्तरायन और दक्षिणायन



तीन देव : ब्रह्मा, विष्णु, शंकर
तीन देवियाँ : महा सरस्वती, महा लक्ष्मी, महा गौरी
तीन लोक : पृथ्वी, आकाश, पाताल
तीन गुण : सत्वगुण, रजोगुण, तमोगुण
तीन स्थिति : ठोस, द्रव, गैस
तीन स्तर : प्रारंभ, मध्य, अंत
तीन पड़ाव : बचपन, जवानी, बुढ़ापा
तीन रचनाएँ : देव, दानव, मानव
तीन अवस्था : जागृत, मृत, बेहोशी
तीन काल : भूत, भविष्य, वर्तमान
तीन नाड़ी : इडा, पिंगला, सुषुम्ना
तीन संध्या : प्रात:, मध्याह्न, सायं
तीन शक्ति : इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति, क्रियाशक्ति



चार धाम : बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम्, द्वारका
चार मुनि : सनत, सनातन, सनंद, सनत कुमार
चार वर्ण : ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र
चार निति : साम, दाम, दंड, भेद
चार वेद : सामवेद, ॠग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद
चार स्त्री : माता, पत्नी, बहन, पुत्री
चार युग : सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग, कलयुग
चार समय : सुबह,दोपहर, शाम, रात
चार अप्सरा : उर्वशी, रंभा, मेनका, तिलोत्तमा
चार गुरु : माता, पिता, शिक्षक, आध्यात्मिक गुरु
चार प्राणी : जलचर, थलचर, नभचर, उभयचर
चार जीव : अण्डज, पिंडज, स्वेदज, उद्भिज
चार वाणी : ओम्कार्, अकार्, उकार, मकार्
चार आश्रम : ब्रह्मचर्य, ग्रहस्थ, वानप्रस्थ, सन्यास
चार भोज्य : खाद्य, पेय, लेह्य, चोष्य
चार पुरुषार्थ : धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष
चार वाद्य : तत्, सुषिर, अवनद्व, घन



पाँच तत्व : पृथ्वी, आकाश, अग्नि, जल, वायु
पाँच देवता : गणेश, दुर्गा, विष्णु, शंकर, सुर्य
पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ : आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा
पाँच कर्म : रस, रुप, गंध, स्पर्श, ध्वनि
पाँच उंगलियां : अँगूठा, तर्जनी, मध्यमा, अनामिका, कनिष्ठा
पाँच पूजा उपचार : गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य
पाँच अमृत : दूध, दही, घी, शहद, शक्कर
पाँच प्रेत : भूत, पिशाच, वैताल, कुष्मांड, ब्रह्मराक्षस
पाँच स्वाद : मीठा, चर्खा, खट्टा, खारा, कड़वा
पाँच वायु : प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान
पाँच इन्द्रियाँ : आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा, मन
पाँच वटवृक्ष : सिद्धवट (उज्जैन), अक्षयवट (Prayagraj), बोधिवट (बोधगया), वंशीवट (वृंदावन), साक्षीवट (गया)
पाँच पत्ते : आम, पीपल, बरगद, गुलर, अशोक
पाँच कन्या : अहिल्या, तारा, मंदोदरी, कुंती, द्रौपदी



छ: ॠतु : शीत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, बसंत, शिशिर
छ: ज्ञान के अंग : शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष
छ: कर्म : देवपूजा, गुरु उपासना, स्वाध्याय, संयम, तप, दान
छ: दोष : काम, क्रोध, मद (घमंड), लोभ (लालच), मोह, आलस्



सात छंद : गायत्री, उष्णिक, अनुष्टुप, वृहती, पंक्ति, त्रिष्टुप, जगती
सात स्वर : सा, रे, ग, म, प, ध, नि
सात सुर : षडज्, ॠषभ्, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत, निषाद
सात चक्र : सहस्त्रार, आज्ञा, विशुद्ध, अनाहत, मणिपुर, स्वाधिष्ठान, मूलाधार
सात वार : रवि, सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि
सात मिट्टी : गौशाला, घुड़साल, हाथीसाल, राजद्वार, बाम्बी की मिट्टी, नदी संगम, तालाब
सात महाद्वीप : जम्बुद्वीप (एशिया), प्लक्षद्वीप, शाल्मलीद्वीप, कुशद्वीप, क्रौंचद्वीप, शाकद्वीप, पुष्करद्वीप
सात ॠषि : वशिष्ठ, विश्वामित्र, कण्व, भारद्वाज, अत्रि, वामदेव, शौनक
सात ॠषि : वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र, भारद्वाज
सात धातु (शारीरिक) : रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, वीर्य
सात रंग : बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल
सात पाताल : अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल, पाताल
सात पुरी : मथुरा, हरिद्वार, काशी, अयोध्या, उज्जैन, द्वारका, काञ्ची
सात धान्य : गेहूँ, चना, चांवल, जौ मूँग,उड़द, बाजरा



आठ मातृका : ब्राह्मी, वैष्णवी, माहेश्वरी, कौमारी, ऐन्द्री, वाराही, नारसिंही, चामुंडा
आठ लक्ष्मी : आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, संतानलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी
आठ वसु : अप (अह:/अयज), ध्रुव, सोम, धर, अनिल, अनल, प्रत्युष, प्रभास
आठ सिद्धि : अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व
आठ धातु : सोना, चांदी, तांबा, सीसा जस्ता, टिन, लोहा, पारा



नवदुर्गा : शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कुष्मांडा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री
नवग्रह : सुर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु
नवरत्न : हीरा, पन्ना, मोती, माणिक, मूंगा, पुखराज, नीलम, गोमेद, लहसुनिया
नवनिधि : पद्मनिधि, महापद्मनिधि, नीलनिधि, मुकुंदनिधि, नंदनिधि, मकरनिधि, कच्छपनिधि, शंखनिधि, खर्व/मिश्र निधि



दस महाविद्या : काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्तिका, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला
दस दिशाएँ : पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, आग्नेय, नैॠत्य, वायव्य, ईशान, ऊपर, नीचे
दस दिक्पाल : इन्द्र, अग्नि, यमराज, नैॠिति, वरुण, वायुदेव, कुबेर, ईशान, ब्रह्मा, अनंत
दस अवतार (विष्णुजी) : मत्स्य, कच्छप, वाराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध, कल्कि
दस सती : सावित्री, अनुसुइया, मंदोदरी, तुलसी, द्रौपदी, गांधारी, सीता, दमयन्ती, सुलक्षणा, अरुंधती

नोट : कृपया पोस्ट को बच्चो को कण्ठस्थ करा दे इससे घर में भारतीय संस्कृति जीवित रहेगी.

उक्त जानकारी शास्त्रोक्त 📚 आधार पर... हैं ।
यह आपको पसंद आया हो तो अपने बन्धुओं को भी शेयर जरूर कर अनुग्रहित अवश्य करें यह संस्कार का कुछ हिस्सा हैं 🌷 💐

Wednesday, September 30, 2020

रामायण में भोग नहीं त्याग है, सभी के त्याग के कारण ही है आपस मे विश्वास

रामायण में भोग नहीं त्याग है, सभी के त्याग के कारण ही है आपस मे विश्वास*

*एक रात की बात हैं,माता कौशिल्या जी को सोते में अपने महल की छत पर किसी के चलने की आहट सुनाई दी। नींद खुल गई । पूछा कौन हैं ?*

*मालूम पड़ा श्रुतिकीर्ति जी हैं ।नीचे बुलाया गया ।*

*श्रुतिकीर्ति जी, जो सबसे छोटी हैं, आईं, चरणों में प्रणाम कर खड़ी रह गईं ।*

*माता कौशिल्या जी ने पूछा, श्रुति ! इतनी रात को अकेली छत पर क्या कर रही हो बिटिया ? क्या नींद नहीं आ रही ?*

*शत्रुघ्न कहाँ है ?*

*श्रुतिकीर्ति की आँखें भर आईं, माँ की छाती से चिपटी, गोद में सिमट गईं, बोलीं, माँ उन्हें तो देखे हुए तेरह वर्ष हो गए ।*

*उफ ! कौशल्या जी का ह्रदय काँप गया ।*

*तुरंत आवाज लगी, सेवक दौड़े आए । आधी रात ही पालकी तैयार हुई, आज शत्रुघ्न जी की खोज होगी, माँ चली ।*

*आपको मालूम है शत्रुघ्न जी कहाँ मिले ?*

*अयोध्या जी के जिस दरवाजे के बाहर भरत जी नंदिग्राम में तपस्वी होकर रहते हैं, उसी दरवाजे के भीतर एक पत्थर की शिला हैं, उसी शिला पर, अपनी बाँह का तकिया बनाकर लेटे मिले ।*

*माँ सिराहने बैठ गईं, बालों में* *हाथ फिराया तो शत्रुघ्न जी ने* *आँखें*
*खोलीं, माँ !*

*उठे, चरणों में गिरे, माँ ! आपने क्यों कष्ट किया ? मुझे बुलवा लिया होता ।*

*माँ ने कहा, शत्रुघ्न ! यहाँ क्यों ?”*

*शत्रुघ्न जी की रुलाई फूट पड़ी, बोले- माँ ! भैया राम जी पिताजी की आज्ञा से वन चले गए, भैया लक्ष्मण जी उनके पीछे चले गए, भैया भरत जी भी
नंदिग्राम में हैं, क्या ये महल, ये रथ, ये राजसी वस्त्र, विधाता ने मेरे ही लिए बनाए हैं ?*

*माता कौशल्या जी निरुत्तर रह गईं ।*

*देखो यह रामकथा हैं…*

*यह भोग की नहीं त्याग की कथा हैं, यहाँ त्याग की प्रतियोगिता चल रही हैं और सभी प्रथम हैं, कोई पीछे नहीं रहा*

*चारो भाइयों का प्रेम और त्याग एक दूसरे के प्रति अद्भुत-अभिनव और अलौकिक हैं ।*

*रामायण जीवन जीने की सबसे उत्तम शिक्षा देती हैं ।*
भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास हुआ तो उनकी पत्नी माँ सीता ने भी सहर्ष वनवास स्वीकार कर लिया। परन्तु बचपन से ही बड़े भाई की सेवा मे रहने वाले लक्ष्मण जी कैसे राम जी से दूर हो जाते! माता सुमित्रा से तो उन्होंने आज्ञा ले ली थी, वन जाने की.. परन्तु जब पत्नी उर्मिला के कक्ष की ओर बढ़ रहे थे तो सोच रहे थे कि माँ ने तो आज्ञा दे दी, परन्तु उर्मिला को कैसे समझाऊंगा!! क्या कहूंगा!! यहीं सोच विचार करके लक्ष्मण जी जैसे ही अपने कक्ष में पहुंचे तो देखा कि उर्मिला जी आरती का थाल लेके खड़ी थीं और बोलीं- “आप मेरी चिंता छोड़ प्रभु की सेवा में वन को जाओ। मैं आपको नहीं रोकूँगीं। मेरे कारण आपकी सेवा में कोई बाधा न आये, इसलिये साथ जाने की जिद्द भी नहीं करूंगी।”लक्ष्मण जी को कहने में संकोच हो रहा था। परन्तु उनके कुछ कहने से पहले ही उर्मिला जी ने उन्हें संकोच से बाहर निकाल दिया। वास्तव में यहीं पत्नी का धर्म है। पति संकोच में पड़े, उससे पहले ही पत्नी उसके मन की बात जानकर उसे संकोच से बाहर कर दे!!
लक्ष्मण जी चले गये परन्तु 14 वर्ष तक उर्मिला ने एक तपस्विनी की भांति कठोर तप किया। वन में भैया-भाभी की सेवा में लक्ष्मण जी कभी सोये नहीं परन्तु उर्मिला ने भी अपने महलों के द्वार कभी बंद नहीं किये और सारी रात जाग जागकर उस दीपक की लौ को बुझने नहीं दिया। मेघनाथ से युद्ध करते हुए जब लक्ष्मण को शक्ति लग जाती है और हनुमान जी उनके लिये संजीवनी का पहाड़ लेके लौट रहे होते हैं, तो बीच में अयोध्या में भरत जी उन्हें राक्षस समझकर बाण मारते हैं और हनुमान जी गिर जाते हैं। तब हनुमान जी सारा वृत्तांत सुनाते हैं कि सीता जी को रावण ले गया, लक्ष्मण जी मूर्छित हैं। यह सुनते ही कौशल्या जी कहती हैं कि राम को कहना कि लक्ष्मण के बिना अयोध्या में पैर भी मत रखना। राम वन में ही रहे। माता सुमित्रा कहती हैं कि राम से कहना कि कोई बात नहीं। अभी शत्रुघ्न है। मैं उसे भेज दूंगी। मेरे दोनों पुत्र राम सेवा के लिये ही तो जन्मे हैं। माताओं का प्रेम देखकर हनुमान जी की आँखों से अश्रुधारा बह रही थी। परन्तु जब उन्होंने उर्मिला जी को देखा तो सोचने लगे कि यह क्यों एकदम शांत और प्रसन्न खड़ी हैं? क्या इन्हें अपनी पति के प्राणों की कोई चिंता नहीं?? हनुमान जी पूछते हैं- देवी! आपकी प्रसन्नता का कारण क्या है? आपके पति के प्राण संकट में हैं। सूर्य उदित होते ही सूर्य कुल का दीपक बुझ जायेगा। उर्मिला जी का उत्तर सुनकर तीनों लोकों का कोई भी प्राणी उनकी वंदना किये बिना नहीं रह पाएगा। वे बोलीं- ”
मेरा दीपक संकट में नहीं है, वो बुझ ही नहीं सकता। रही सूर्योदय की बात तो आप चाहें तो कुछ दिन अयोध्या में विश्राम कर लीजिये, क्योंकि आपके वहां पहुंचे बिना सूर्य उदित हो ही नहीं सकता। आपने कहा कि प्रभु श्रीराम मेरे पति को अपनी गोद में लेकर बैठे हैं। जो योगेश्वर राम की गोदी में लेटा हो, काल उसे छू भी नहीं सकता। यह तो वो दोनों लीला कर रहे हैं। मेरे पति जब से वन गये हैं, तबसे सोये नहीं हैं। उन्होंने न सोने का प्रण लिया था। इसलिए वे थोड़ी देर विश्राम कर रहे हैं। और जब भगवान् की गोद मिल गयी तो थोड़ा विश्राम ज्यादा हो गया। वे उठ जायेंगे। और शक्ति मेरे पति को लगी ही नहीं शक्ति तो राम जी को लगी है। मेरे पति की हर श्वास में राम हैं, हर धड़कन में राम, उनके रोम रोम में राम हैं, उनके खून की बूंद बूंद में राम हैं, और जब उनके शरीर और आत्मा में हैं ही सिर्फ राम, तो शक्ति राम जी को ही लगी, दर्द राम जी को ही हो रहा। इसलिये हनुमान जी आप निश्चिन्त होके जाएँ। सूर्य उदित नहीं होगा।” राम राज्य की नींव जनक की बेटियां ही थीं… कभी सीता तो कभी उर्मिला। भगवान् राम ने तो केवल राम राज्य का कलश स्थापित किया परन्तु वास्तव में राम राज्य इन सबके प्रेम, त्याग, समर्पण , बलिदान से ही आया ।
“जय जय सियाराम”
“जयश्रीराधेकृष्णा”

Friday, January 22, 2016

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Tuesday, January 19, 2016

general knowledge for kids


बच्चों को राज्यों के नाम याद रखने में परेशानी होती है । इसके समाधान के लिए एक छोटा सा प्रयास किया है । राज्यों के लिए एक पंक्ति बनाई है । जिसके एक वर्ण से एक राज्य बनता है । शायद अध्यापक साथियों को ये प्रयास पसन्द आए -

राज्यों के लिए पंक्ति-
" मित्र अतरा मुझसे कहता है मैं अपने छ: बागों में आम की उपज उगाऊ" ।

मि-मिजोरम
त्र -त्रिपुरा
अ - असम
त - तमिलनाडू
रा - राजस्थान
मु -मणिपुर
झ - झारखंड
से - सिक्किम
क -केरल
ह -हरियाणा
ते - तेलंगाना
है - हिमाचल
में - मेघालय
अ - अरूणाचल
प - प. बंगाल
ने - नागालैंड
छः - छत्तीसगढ
बा - बिहार
गों -गोवा
में - मध्यप्रदेश
आ - आंध्रप्रदेश
म - महाराष्ट्र
की -कर्नाटक
उ - उत्तराखंड
प - पंजाब
ज - जम्मू - कश्मीर
उ - उड़ीसा
गा - गुजरात
उ- उत्तरप्रदेश

विश्व विरासत मे शामिल राजस्थान के 6 दुर्ग
TRICK :- “चीकु गाजर आम”
1. चि – चित्तौड़
2. कु – कुंभलगढ राजसंमद
3. गा – गागरोन झालावाड़
4. ज – जैसलमेर सोनार
5. र – रणथम्भौर स॰माधोपुर
6. आम – आमेर जयपुर

Trick भारत की स्थल सीमा पर पड़ोसी देश
TRICK — “बचपन मेँ MBA किया”
ब——-बंग्लादेश———(4,096KM)
च——-चीन————-(3,917KM)
प——-पाकिस्तान——-(3,310KM)
न——-नेपाल————(1,752KM).
मेँ——-(silent)
M——-म्यामार———-(1,458KM)
B——–भूटान———–(587KM)
A——–अफगानिस्तान–(80KM) किया—(silent)

Forwarded msg कुछ रोचक जानकारी क्या आपको पता है ?

1. चीनी को जब चोट पर लगाया जाता है, दर्द तुरंत कम हो जाता है...
2. जरूरत से ज्यादा टेंशन आपके दिमाग को कुछ समय के लिए बंद कर सकती है...
3. 92% लोग सिर्फ हस देते हैं जब उन्हे सामने वाले की बात समझ नही आती...
4. बतक अपने आधे दिमाग को सुला सकती हैंजबकि उनका आधा दिमाग जगा रहता....
5. कोई भी अपने आप को सांस रोककर नही मार सकता...
6. स्टडी के अनुसार : होशियार लोग ज्यादा तर अपने आप से बातें करते हैं...
7. सुबह एक कप चाय की बजाए एक गिलास ठंडा पानी आपकी नींद जल्दी खोल देता है...
8. जुराब पहन कर सोने वाले लोग रात को बहुत कम बार जागते हैं या बिल्कुल नही जागते...
9. फेसबुक बनाने वाले मार्क जुकरबर्ग के पास कोई कालेज डिगरी नही है...
10. आपका दिमाग एक भी चेहरा अपने आप नही बना सकता आप जो भी चेहरे सपनों में देखते हैं वो जिदंगी में कभी ना कभी आपके द्वारा देखे जा चुके होते हैं...
11. अगर कोई आप की तरफ घूर रहा हो तो आप को खुद एहसास हो जाता है चाहे आप नींद में ही क्यों ना हो...
12. दुनिया में सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाने वाला पासवर्ड 123456 है.....
13. 85% लोग सोने से पहले वो सब सोचते हैं जो वो अपनी जिंदगी में करना चाहते हैं...
14. खुश रहने वालों की बजाए परेशान रहने वाले लोग ज्यादा पैसे खर्च करते हैं...
15. माँ अपने बच्चे के भार का तकरीबन सही अदांजा लगा सकती है जबकि बाप उसकी लम्बाई का...
16. पढना और सपने लेना हमारे दिमाग के अलग-अलग भागों की क्रिया है इसी लिए हम सपने में पढ नही पाते...
17. अगर एक चींटी का आकार एक आदमी के बराबर हो तो वो कार से दुगुनी तेजी से दौडेगी...
18. आप सोचना बंद नही कर सकते.....
19. चींटीयाँ कभी नही सोती...
20. हाथी ही एक एसा जानवर है जो कूद नही सकता...
21. जीभ हमारे शरीर की सबसे मजबूत मासपेशी है...
22. नील आर्मस्ट्रांग ने चन्द्रमा पर अपना बायां पाँव पहलेरखा था उस समय उसका दिल 1 मिनट में 156 बार धडक रहा था...
23. पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल के कारण पर्वतों का 15,000मीटर से ऊँचा होना संभव नही है...
23. शहद हजारों सालों तक खराब नही होता..
24. समुंद्री केकडे का दिल उसके सिर में होता है...
25. कुछ कीडे भोजन ना मिलने पर खुद को ही खा जाते है....
26. छींकते वक्त दिल की धडकन 1 मिली सेकेंड के लिए रूक जाती है...
27. लगातार 11 दिन से अधिक जागना असंभव है...
28. हमारे शरीर में इतना लोहा होता है कि उससे 1 इंच लंबी कील बनाई जा सकती है.....
29. बिल गेट्स 1 सेकेंड में करीब 12,000 रूपए कमाते हैं...
30. आप को कभी भी ये याद नही रहेगा कि आपका सपना कहां से शुरू हुआ था...
31. हर सेकेंड 100 बार आसमानी बिजली धरती पर गिरती है...
32. कंगारू उल्टा नही चल सकते...
33. इंटरनेट पर 80% ट्रैफिक सर्च इंजन से आती है...
34. एक गिलहरी की उमर,, 9 साल होती है...
35. हमारे हर रोज 200 बाल झडते हैं...
36. हमारा बांया पांव हमारे दांये पांव से बडा होता हैं...
37. गिलहरी का एक दांत हमेशा बढता रहता है....
38. दुनिया के 100 सबसे अमीर आदमी एक साल में इतना कमा लेते हैं जिससे दुनिया की गरीबी 4 बार खत्म की जा सकती है...
39. एक शुतुरमुर्ग की आँखे उसके दिमाग से बडी होती है...
40. चमगादड गुफा से निकलकर हमेशा बांई तरफ मुडती है...
41. ऊँट के दूध की दही नही बन सकता...
42. एक काॅकरोच सिर कटने के बाद भी कई दिन तक जिवित रह सकता है...
43. कोका कोला का असली रंग हरा था...
44. लाइटर का अविष्कार माचिस से पहले हुआ था...
45. रूपए कागज से नहीं बल्कि कपास से बनते है...
46. स्त्रियों की कमीज के बटन बाईं तरफ जबकि पुरूषों की कमीजके बटन दाईं तरफ होते हैं...
47. मनुष्य के दिमाग में 80% पानी होता है.
48. मनुष्य का खून 21 दिन तक स्टोर किया जा सकता है...
49. फिंगर प्रिंट की तरह मनुष्य की जीभ के निशान भी अलग-अलग होते हैं...
विश्व कासामान्य ज्ञान

विश्व का ऐसा कौन सा देश है जिसने कभी किसी युद्ध में भाग नहीं लिया?
:- स्विट्जरलैंड

विश्व का का कौन सा ऐसा देश है जिसके एक भाग में शाम और एक भाग में दिन होता है?
:- रूस

विश्व का सबसे बड़ा एअरपोर्ट कौन सा है?
:- टेक्सास का फोर्थ बर्थ (अमेरिका में)

विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला शहर कौन सा है?
:- टोकियो

विश्व की लम्बी नहर कौन सी है?
:- स्वेज नहर (168 कि.मी. मिस्र में)

विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य कौन सा है?
:- महाभारत.

आप सबसे निवेदन है की चुटकले भेजने की बजाय यह सन्देश सबको भेजे ताकि सब लोग देख सके ।

विश्व में भारत के अलावा 15 अगस्त को ही स्वतन्त्रता दिवस और किस देश में मनाया जाता है?
:- कोरिया में

विश्व का ऐसा कौन सा देश है जो आज तक किसी का गुलाम नहीं हुआ?
:- नेपाल

विश्व का सबसे पुराना समाचार पत्र कौन सा है?
:- स्वीडन आफिशियल जनरल (1645 में प्रकाशित)

विश्व में कुल कितने देश हैं?
:- 353

विश्व में ऐसा कौन सा देश है जहाँ के डाक टिकट पर उस देश का नाम नहीं होता?
:- ग्रेट ब्रिटेन

विश्व की सबसे बड़ी मस्जिद कौन सी है?
:- अलमल्विया (इराक)

विश्व का किस देश में कोई भी मंदिर-मस्जिद नहीं है?
:- सउदी अरब

विश्व का सबसे बड़ा महासागर कौन सा है?
:- प्रशांत महासागर

विश्व में सबसे बड़ी झील कौन सी है?
:- केस्पो यनसी (रूस में)

विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीप कौन सा है?
:- एशिया विश्व की सबसे बड़ी दीवार कौन सी है?
:- ग्रेट वाल ऑफ़ चायना (चीन की दीवार)

विश्व में सबसे कठोर कानून वाला देश कौन सा है?
:- सउदी अरब

विश्व के किस देश में सफेद हाथी पाये जाते हैं?
:- थाईलैंड

विश्व में सबसे अधिक वेतन किसे मिलता है?
:- अमेरिका के राष्टपति को

विश्व में किस देश के राष्टपति का कार्यकाल एक साल का होता है?
:- स्विट्जरलैंड

विश्व की सबसे बड़ी नदी कौन सी है?
:- नील नदी(6648 कि.मी.)

विश्व का सबसे बड़ा रेगिस्तान कौन सा है?
:- सहारा (84,00,000 वर्ग कि.मी., अफ्रीका में)

विश्व की सबसे मँहगी वस्तु कौन सी है?
:- यूरेनियम

विश्व की सबसे प्राचीन भाषा कौन सी है?
:- संस्कृत

शाखाओं की संख्या की दृष्टि से विश्व का सबसे बड़ा बैंक कौन सा है?
:- भारतीय स्टेट बैंक

कैसी लगी जानकारी

Tuesday, January 12, 2016

some useful keyword Very Important & Useful full forms.


WML is Wireless Markup language
HTML is Hyperlink Text Terminal Protocol
XML is Extensible Markup Language
PHP is Hypertext Processor
ASP is Active Server Page
JSP is Java Server Pages
JS is Java Script
ADIDAS- All Day I Dream AboutSports
AUDI-Auto Union Deutschland Ingolstadt
BMW- Baverian Motor Works
AMW- Asian Motor Works
GOOGLE- Global Organization Of Oriented Group Language of Earth
CNN-IBN- Cable News Network-Indian Broadcasting Network
VVS Laxman- Vengipurapu Venkata Sai Laxman
APJ Abdul Kalam- Avul Pakir Jainulabdeen Abdul Kalam
MDH(Massala)- Mahashian Di Hatti
ISCON- International Society for Krishna Consciousness
LASER- Light Amplification by Stimulated Emission of Radiation
i.e- id est (that is)
DNA- Deoxy-ribo Nucleic Acid
CBI- Central Bureau of Investigation
CAT- Common Admissiom Test
RDX- Research Department Explosive
MRF- Madras Rubber Factory
LML- Lohia Machines Limited
STD- Subscriber Trunk Dialling
TOEFL- Test of English as a Foreign Language
SENSEX- Sensitivity Index(of share price)
URL- Uniform Resource Locator
TVS- T.V Sundaram(Co-Founder)
BBC-British Broadcasting Corporation
ATM- Automated Teller Machine
ISI- Indian Standard Institute
IPI- International Press Institute
AT&T- American telegraphic and Telephone Co. Ltd.
ICICI- Industrial Credit and Investment Corporation of India
IDBI- Industrial Development Bank of India
FBI- Federal Bureau of Investigation
HDFC- Housing Development Finance Corporation
VIRUS- Vital Information Resources Under Siege
OBC- Other Backward Classes
MPEG- Motion Picture Experts Groups
NAAC- National Assesment and Accreditation
PSLV- Polar Satelite Launch Vehicle
RADAR- Radio Detecting and Ranging
INTEL- Integrated Electronics
CMYK- Cyan Magenta Yellow Kinda(Black)
JPEG- Joint Photography Expert Group
EMI- Equated Monthly Instalments
WIPRO- Western Indian Products

What is the full form of computer?
C= Common
O= Oriented
M= Machine
P= Particularly
U= United and used under
T= Technical and
E= Educational
R= Research.

तजुर्बे ने ये 10 बातें सिखाई है


(1) आजकल लोग समझते 'कम' और समझाते 'ज्यादा' हैं, तभी तो मामले सुलझते 'कम' उलझते 'ज्यादा' हैं! .
(2) ज़ुबान की हिफाज़त, दौलत से ज्यादा मुश्किल है ! .
(3) गरीबों का मज़ाक मत उड़ाओ, क्युँकि गरीब होने में वक्त नहीं लगता! .
(4) अगर इबादत नहीं कर सकते, तो गुनाह भी मत करो ! .
(5) दुनिया ये नहीं देखती कि तुम पहले क्या थे, बल्कि ये देखती है कि तुम अब क्या हो ! .
(6) जहां अपनी बात की कदर ना हो, वहां चुप रहना ही बेहतर है ! .
(7) धनवान वह नहीं, जिसकी तिजोरी नोटों से भरी हो , धनवान तो वो हैं जिसकी तिजोरी रिश्तों से भरी हो ! .
(8) लोगों से मिलते वक्त इतना मत झुको, कि उठते वक्त सहारा लेना पड़े! .
(9) शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी, पर चुप इसलिये हु कि, जो दिया तूने, वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता! .
(10) न सफारी में नज़र आई और न ही फरारी में नज़र आई; जो खुशिया बचपन मै दोस्तों के साथ साईकिल की सवारी में नज़र आई !!

Monday, July 6, 2015

How to create Accordion in simple jQuery code .

How to create Accordion in simple  jQuery code .

It's very simple now create simple html code and apply this simple jquery code as like this

HTML Code here
<div id="accordion">
    <h2><a href="#">Accordian Tab 1</a></h2>
    <div>
      <p>Accordian Tab 1 Data</p>
    </div>
    <h2><a href="#">Accordian Tab 2</a></h2>
    <div>
      <p>Accordian Tab 2 Data</p><br />
    </div>
    <h2><a href="#">Accordian Tab 3</a></h2>
    <div>
      <p>Accordian Tab 3 Data</p>
    </div>
    <h2><a href="#">Accordian Tab 4</a></h2>
    <div>
      <p>Accordian Tab 4 Data</p>
    </div>
  </div>
Css Code here
body {
  font-family: arial;
  font-size: 12px;
}
#accordion h2 {
  padding: 10px;
  margin: 0;
  border: 1px solid #4679bd;
  background-color: #4072b4;
  font-size: 14px;
  border-top: 3px solid #ccc;
}
#accordion h2 a {
  text-decoration: none;
  color: #ffffff;
}
#accordion div {
  padding: 0 10px;
  margin: 0;
  border: 1px solid #4679bd;
  color: #000;
}
Jquery Code here
$(document).ready(function() {
  $("#accordion div").hide();
  $("#accordion h2").click(function() {
    $(this).next("#accordion div").slideToggle("slow").siblings("#accordion div").slideUp("slow");
  });
});
Demo Jsfiddle

Thursday, April 18, 2013

नवरात्रि क्या है ?? और नवरात्र का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक रहस्य ::

नवरात्रि क्या है ?? और नवरात्र का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक रहस्य ::

नवरात्र शब्द से नव अहोरात्रों (विशेष रात्रियां) का बोध होता है। इस समय शक्ति के नव रूपों की उपासना की जाती है। 'रात्रि' शब्द सिद्धि का प्रतीक है।

भारत के प्राचीन ऋषियों-मुनियों ने रात्रि को दिन की अपेक्षा अधिक महत्व दिया है, इसलिए दीपावली, होलिका, शिवरात्रि और नवरात्र आदि उत्सवों को रात में ही मनाने की परंपरा है। यदि रात्रि का कोई विशेष रहस्य न होता,... तो ऐसे उत्सवों को रात्रि न कह कर दिन ही कहा जाता। लेकिन नवरात्र के दिन, नवदिन नहीं कहे जाते।

मनीषियों ने वर्ष में दो बार नवरात्रों का विधान बनाया है। विक्रम संवत के पहले दिन अर्थात चैत्र मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पहली तिथि) से नौ दिन अर्थात नवमी तक। और इसी प्रकार ठीक छह मास बाद आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से महानवमी अर्थात विजयादशमी के एक दिन पूर्व तक। परंतु सिद्धि और साधना की दृष्टि से शारदीय नवरात्रों को ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है।इन नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति संचय करने के लिए अनेक प्रकार के व्रत, संयम, नियम, यज्ञ, भजन, पूजन, योग साधना आदि करते हैं। कुछ साधक इन रात्रियों में पूरी रात पद्मासन या सिद्धासन में बैठकर आंतरिक त्राटक या बीज मंत्रों के जाप द्वारा विशेष सिद्धियां प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

नवरात्रों में शक्ति के 51 पीठों पर भक्तों का समुदाय बड़े उत्साह से शक्ति की उपासना के लिए एकत्रित होता है। जो उपासक इन शक्ति पीठों पर नहीं पहुंच पाते, वे अपने निवास स्थल पर ही शक्ति का आह्वान करते हैं।

आजकल अधिकांश उपासक शक्ति पूजा रात्रि में नहीं, पुरोहित को दिन में ही बुलाकर संपन्न करा देते हैं। सामान्य भक्त ही नहीं, पंडित और साधु-महात्मा भी अब नवरात्रों में पूरी रात जागना नहीं चाहते। न कोई आलस्य को त्यागना चाहता है। बहुत कम उपासक आलस्य को त्याग कर आत्मशक्ति, मानसिक शक्ति और यौगिक शक्ति की प्राप्ति के लिए रात्रि के समय का उपयोग करते देखे जाते हैं।मनीषियों ने रात्रि के महत्व को अत्यंत सूक्ष्मता के साथ वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में समझने और समझाने का प्रयत्न किया। रात्रि में प्रकृति के बहुत सारे अवरोध खत्म हो जाते हैं। आधुनिक विज्ञान भी इस बात से सहमत है। हमारे ऋषि - मुनि आज से कितने ही हजारों वर्ष पूर्व ही प्रकृति के इन वैज्ञानिक रहस्यों को जान चुके थे।

दिन में आवाज दी जाए तो वह दूर तक नहीं जाएगी , किंतु रात्रि को आवाज दी जाए तो वह बहुत दूर तक जाती है। इसके पीछे दिन के कोलाहल के अलावा एक वैज्ञानिक तथ्य यह भी है कि दिन में सूर्य की किरणें आवाज की तरंगों और रेडियो तरंगों को आगे बढ़ने से रोक देती हैं। रेडियो इस बात का जीता - जागता उदाहरण है। कम शक्ति के रेडियो स्टेशनों को दिन में पकड़ना अर्थात सुनना मुश्किल होता है , जबकि सूर्यास्त के बाद छोटे से छोटा रेडियो स्टेशन भी आसानी से सुना जा सकता है।

वैज्ञानिक सिद्धांत →
वैज्ञानिक सिद्धांत यह है कि सूर्य की किरणें दिन के समय रेडियो तरंगों को जिस प्रकार रोकती हैं, उसी प्रकार मंत्र जाप की विचार तरंगों में भी दिन के समय रुकावट पड़ती है। इसीलिए ऋषि - मुनियों ने रात्रि का महत्व दिन की अपेक्षा बहुत अधिक बताया है। मंदिरों में घंटे और शंख की आवाज के कंपन से दूर - दूर तक वातावरण कीटाणुओं से रहित हो जाता है। यह रात्रि का वैज्ञानिक रहस्य है। जो इस वैज्ञानिक तथ्य को ध्यान में रखते हुए रात्रियों में संकल्प और उच्च अवधारणा के साथ अपने शक्तिशाली विचार तरंगों को वायुमंडल में भेजते हैं , उनकी कार्यसिद्धि अर्थात मनोकामना सिद्धि , उनके शुभ संकल्प के अनुसार उचित समय और ठीक विधि के अनुसार करने पर अवश्य होती है।

नवरात्र या नवरात्रि →
संस्कृत व्याकरण के अनुसार नवरात्रि कहना त्रुटिपूर्ण हैं। नौ रात्रियों का समाहार, समूह होने के कारण से द्वन्द समास होने के कारण यह शब्द पुलिंग रूप 'नवरात्र' में ही शुध्द है।

नवरात्र क्या है →
पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा के काल में एक साल की चार संधियाँ हैं। उनमें मार्च व सितंबर माह में पड़ने वाली गोल संधियों में साल के दो मुख्य नवरात्र पड़ते हैं। इस समय रोगाणु आक्रमण की सर्वाधिक संभावना होती है। ऋतु संधियों में अक्सर शारीरिक बीमारियाँ बढ़ती हैं, अत: उस समय स्वस्थ रहने के लिए, शरीर को शुध्द रखने के लिए और तनमन को निर्मल और पूर्णत: स्वस्थ रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया का नाम 'नवरात्र' है।

नौ दिन या रात →
अमावस्या की रात से अष्टमी तक या पड़वा से नवमी की दोपहर तक व्रत नियम चलने से नौ रात यानी 'नवरात्र' नाम सार्थक है। यहाँ रात गिनते हैं, इसलिए नवरात्र यानि नौ रातों का समूह कहा जाता है।रूपक के द्वारा हमारे शरीर को नौ मुख्य द्वारों वाला कहा गया है। इसके भीतर निवास करने वाली जीवनी शक्ति का नाम ही दुर्गा देवी है। इन मुख्य इन्द्रियों के अनुशासन, स्वच्छ्ता, तारतम्य स्थापित करने के प्रतीक रूप में, शरीर तंत्र को पूरे साल के लिए सुचारू रूप से क्रियाशील रखने के लिए नौ द्वारों की शुध्दि का पर्व नौ दिन मनाया जाता है। इनको व्यक्तिगत रूप से महत्व देने के लिए नौ दिन नौ दुर्गाओं के लिए कहे जाते हैं।
शरीर को सुचारू रखने के लिए विरेचन, सफाई या शुध्दि प्रतिदिन तो हम करते ही हैं किन्तु अंग-प्रत्यंगों की पूरी तरह से भीतरी सफाई करने के लिए हर छ: माह के अंतर से सफाई अभियान चलाया जाता है। सात्विक आहार के व्रत का पालन करने से शरीर की शुध्दि, साफ सुथरे शरीर में शुध्द बुद्धि, उत्तम विचारों से ही उत्तम कर्म, कर्मों से सच्चरित्रता और क्रमश: मन शुध्द होता है। स्वच्छ मन मंदिर में ही तो ईश्वर की शक्ति का स्थायी निवास होता है।

नौ देवियाँ / नव देवी →
नौ दिन यानि हिन्दी माह चैत्र और आश्विन के शुक्ल पक्ष की पड़वा यानि पहली तिथि से नौवी तिथि तक प्रत्येक दिन की एक देवी मतलब नौ द्वार वाले दुर्ग के भीतर रहने वाली जीवनी शक्ति रूपी दुर्गा के नौ रूप हैं :

1. शैलपुत्री
2. ब्रह्मचारिणी
3. चंद्रघंटा
4. कूष्माण्डा
5. स्कन्दमाता
6. कात्यायनी
7. कालरात्रि
8. महागौरी
9. सिध्दीदात्री


इनका नौ जड़ी बूटी या ख़ास व्रत की चीजों से भी सम्बंध है, जिन्हे नवरात्र के व्रत में प्रयोग किया जाता है :

1. कुट्टू (शैलान्न)
2. दूध-दही,
3. चौलाई (चंद्रघंटा)
4. पेठा (कूष्माण्डा)
5. श्यामक चावल (स्कन्दमाता)
6. हरी तरकारी (कात्यायनी)
7. काली मिर्च व तुलसी (कालरात्रि)
8. साबूदाना (महागौरी)
9. आंवला(सिध्दीदात्री)

क्रमश: ये नौ प्राकृतिक व्रत खाद्य पदार्थ हैं।


अष्टमी या नवमी →
यह कुल परम्परा के अनुसार तय किया जाता है। भविष्योत्तर पुराण में और देवी भावगत के अनुसार, बेटों वाले परिवार में या पुत्र की चाहना वाले परिवार वालों को नवमी में व्रत खोलना चाहिए। वैसे अष्टमी, नवमी और दशहरे के चार दिन बाद की चौदस, इन तीनों की महत्ता 'दुर्गासप्तशती' में कही गई है।

Thursday, November 29, 2012

चाणक्य सूत्र

।। चाणक्य सूत्र ।।
> मुख्य चाणक्य सूत्र <

- जो बीत गया, सो बीत गया। अपने हाथ से कोई गलत काम हो गया हो तो उसकी फिक्र छोड़ते हुए वर्तमान को सलीके से जीकर भविष्य को संवारना चाहिए।

- बहादुर और बुद्धिमान व्यक्ति अपना रास्ता खुद बनाते हैं। असंभव शब्द का इस्तेमाल बुजदिल करते हैं।

- अपनी कमाई में से धन का कुछ प्रतिशत हिस्सा संकट काल के लिए हमेशा बचाकर रखें।

- अपने परिवार पर संकट आए तो जमा धन कुर्बान कर दें। लेकिन अपनी आत्मा की हिफाजत हमें अपने परिवार और धन को भी दांव पर लगाकर करनी चाहिए।

- भाई-बंधुओं की परख संकट के समय होती है।

- स्त्री की असली परख धन के नष्ट हो जाने पर ही होती है।

- बिना कारण दूसरों के घर पर पड़े रहना कष्टों से भी बड़ा कष्ट है।

- मूर्खता बहुत से कष्टों का कारण बनती है।

- मनुष्य का विकास और विनाश उसके अपने व्यवहार पर निर्भर करता है।

- मूर्ख अपने घर में पूजा जाता, मुखिया अपने गांव में, परंतु विद्वान सर्वत्र पूजा जाता है।

- जिस प्रकार सभी पर्वतों पर मणि नहीं मिलती, सभी हाथियों के मस्तक में मोती उत्पन्न नहीं होता, सभी वनों में चंदन का वृक्ष नहीं होता, उसी प्रकार सज्जन पुरुष सभी जगहों पर नहीं मिलते हैं।

- जो मित्र आपके सामने चिकनी-चुपड़ी बातें करता हो और पीठ पीछे आपके कार्य को बिगाड़ देता हो, उसे त्याग देने में ही भलाई है। चाणक्य कहते हैं कि वह उस बर्तन के समान है, जिसके ऊपर के हिस्से में दूध लगा है परंतु अंदर विष भरा हुआ होता है।

- मूर्खता के समान यौवन भी दुखदायी होता है क्योंकि जवानी में व्यक्ति कामवासना के आवेग में कोई भी मूर्खतापूर्ण कार्य कर सकता है। परंतु इनसे भी अधिक कष्टदायक है दूसरों पर आश्रित रहना।

- बचपन में संतान को जैसी शिक्षा दी जाती है, उनका विकास उसी प्रकार होता है। इसलिए माता-पिता का कर्तव्य है कि वे उन्हें ऐसे मार्ग पर चलाएँ, जिससे उनमें उत्तम चरित्र का विकास हो क्योंकि गुणी व्यक्तियों से ही कुल की शोभा बढ़ती है।

- वे माता-पिता अपने बच्चों के लिए शत्रु के समान हैं, अच्छीजिन्होंने बच्चों को‍ शिक्षा नहीं दी। क्योंकि अनपढ़ बालक का विद्वानों के समूह में उसी प्रकार अपमान होता है जैसे हंसों के झुंड में बगुले की स्थिति होती है। शिक्षा विहीन मनुष्य बिना पूँछ के जानवर जैसा होता है, इसलिए माता-पिता का कर्तव्य है कि वे बच्चों को ऐसी शिक्षा दें जिससे वे समाज को सुशोभित करें।

- अधिक लाड़ प्यार करने से बच्चों में अनेक दोष उत्पन्न हो जाते हैं। इसलिए यदि वे कोई गलत काम करते हैं तो उसे नजरअंदाज करके लाड़-प्यार करना उचित नहीं है। बच्चे को डाँटना भी आवश्यक है।

- जो व्यक्ति अच्छा मित्र नहीं है उस पर तो विश्वास नहीं करना चाहिए, परंतु इसके साथ ही अच्छे मित्र के संबंद में भी पूरा विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि यदि वह नाराज हो गया तो आपके सारे भेद खोल सकता है। अत: सावधानी अत्यंत आवश्यक है।
चाणक्य का मानना है कि व्यक्ति को कभी अपने मन का भेद नहीं खोलना चाहिए। उसे जो भी कार्य करना है, उसे अपने मन में रखे और पूरी तन्मयता के साथ समय आने पर उसे पूरा करना चाहिए।

- जो लोग हमेशा दूसरों की बुराई करके खुश होते हो। ऐसे लोगों से दूर ही रहें। क्योंकि वे कभी भी आपके साथ धोखा कर सकते है। जो किसी और का ना हुआ वो भला आपका क्या होगा।

- जीवन में पुरानी बातों को भुला देना ही उचित होता है। अत: अपनी गलत बातों को भुलाकर वर्तमान को सुधारते हुए जीना चाहिए।

- अगर कोई व्यक्ति कमजोर है तब भी उसे हर समय अपनी कमजोरी का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए।

- किसी भी व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा ईमानदार नहीं होना चाहिए। बहुत ज्यादा ईमानदार लोगों को ही सबसे ज्यादा कष्ट उठाने पड़ते हैं।

- अपने ईमान और धर्म बेचकर कर कमाया गया धन अपने किसी काम का नहीं होता। अत: उसका त्याग करें। आपके लिए यही उत्तम है।

- जो व्यक्ति आपकी बीमारी में, दुख में, दुर्भिक्ष में, शत्रु द्वारा कोई संकट खड़ा करने पर, शासकीय कार्यों में, शमशान में ठीक समय पर आ जाए वही इंसान आपका सच्चा हितैषी हो सकता है।

- भगवान मूर्तियों में नहीं है, आपकी अनुभूति आपका इश्वर है, आत्मा आपका मंदिर है।

- जिस प्रकार एक सूखे पेड़ को अगर आग लगा दी जाये तो वह पूरा जंगल जला देता है, उसी प्रकार एक पापी पुत्र पुरे परिवार को बर्वाद कर देता है।

- सबसे बड़ा गुरु मन्त्र है : कभी भी अपने राज़ दूसरों को मत बताएं, ये आपको बर्वाद कर देगा।

- पहले पाच सालों में अपने बच्चे को बड़े प्यार से रखिये, अगले पांच साल उन्हें डांट-डपट के रखिये, जब वह सोलह साल का हो जाये तो उसके साथ एक मित्र की तरह व्यव्हार करिए, आपके व्यस्क बच्चे ही आपके सबसे अच्छे मित्र हैं।

- फूलों की सुगंध केवल वायु की दिशा में फैलती है, लेकिन एक व्यक्ति की अच्छाई हर दिशा में फैलती है।

Tuesday, October 30, 2012

I am Rohit azad


I m Front End Developer .

www.rohitazad.com I m converted psd into HMTL, XHTML, HTML5 Etc.

If you have any work for regarding HTML  of free lance work than con me .