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राधा कृष्ण भक्ति/कृष्ण मंत्र

मंत्र-पाठ · उच्चारण · अर्थ

श्री कृष्ण मंत्र

नीचे दिए गए पाठ को धीरे-धीरे पढ़ें। संयुक्त शब्दों में हल्का विराम रखें और अपनी पारिवारिक या गुरु-परंपरा के अनुसार उच्चारण का सम्मान करें।

पूर्ण भक्तिमय पद

ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने

प्रणत-क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः ॥

यहाँ “प्रणत-क्लेशनाशाय” को एक संयुक्त भाव के रूप में पढ़ें—शरण आए भक्तों के क्लेश दूर करने वाले।

मंत्र ०1

ॐ कृष्णाय वासुदेवाय
हरये परमात्मने ।
प्रणत-क्लेशनाशाय
गोविन्दाय नमो नमः ॥

उच्चारण

Om Krish-naa-ya Vaa-su-de-vaa-ya · Ha-ra-ye Pa-raat-ma-ne · Pra-na-ta Klesha-Naashaa-ya · Go-vin-daa-ya Na-mo Na-mah

सरल भाव

श्री कृष्ण, वासुदेव, हरि और परमात्मा को प्रणाम; शरण आए भक्तों के क्लेश दूर करने वाले गोविन्द को बार-बार नमन।

मंत्र ०2

ॐ नमो भगवते
वासुदेवाय

उच्चारण

Om Na-mo Bha-ga-va-te Vaa-su-de-vaa-ya

सरल भाव

भगवान वासुदेव को श्रद्धापूर्वक प्रणाम। यह वैष्णव परंपरा में प्रचलित बारह-अक्षरी मंत्र के रूप में जाना जाता है।

मंत्र ०3

ॐ कृष्णाय नमः

उच्चारण

Om Krish-naa-ya Na-mah

सरल भाव

श्री कृष्ण को नमस्कार और समर्पण।

मंत्र ०4

राधे राधे

उच्चारण

Raa-dhe Raa-dhe

सरल भाव

राधा नाम का मधुर और सरल स्मरण।

कथा और भाव

वासुदेव नाम का स्मरण

श्रीमद्भागवत के एक प्रसिद्ध मंत्र-पाठ में “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” को भगवान वासुदेव की उपासना से जोड़ा गया है। इस नाम में कृष्ण को वासुदेव के पुत्र और परमात्मा के रूप में प्रणाम करने का भाव आता है। मंत्र का उद्देश्य भय का दावा करना नहीं, बल्कि श्रद्धा, स्मरण और आत्मिक स्थिरता का अभ्यास है।

मंत्र-साधना को अपनी परंपरा, सुविधा और स्वास्थ्य के अनुसार रखें। किसी विशेष दीक्षा या विस्तृत अनुष्ठान के लिए योग्य गुरु या आचार्य से मार्गदर्शन लें।

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