श्री कृष्ण, वासुदेव, हरि और परमात्मा को प्रणाम; शरण आए भक्तों के क्लेश दूर करने वाले गोविन्द को बार-बार नमन।
मंत्र ०2
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
उच्चारण
Om Na-mo Bha-ga-va-te Vaa-su-de-vaa-ya
सरल भाव
भगवान वासुदेव को श्रद्धापूर्वक प्रणाम। यह वैष्णव परंपरा में प्रचलित बारह-अक्षरी मंत्र के रूप में जाना जाता है।
मंत्र ०3
ॐ कृष्णाय नमः
उच्चारण
Om Krish-naa-ya Na-mah
सरल भाव
श्री कृष्ण को नमस्कार और समर्पण।
मंत्र ०4
राधे राधे
उच्चारण
Raa-dhe Raa-dhe
सरल भाव
राधा नाम का मधुर और सरल स्मरण।
कथा और भाव
वासुदेव नाम का स्मरण
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” श्रीमद्भागवत के आरंभिक मंत्र-पाठ में आता है और वैष्णव परंपरा में इसे बारह-अक्षरी मंत्र के रूप में जाना जाता है। “वासुदेवाय” में वासुदेव-पुत्र श्री कृष्ण को प्रणाम करने का भाव आता है। यहाँ मंत्र को श्रद्धा, स्मरण और आत्मिक स्थिरता के अभ्यास के रूप में रखा गया है; किसी एक परंपरा की दीक्षा-विधि का दावा नहीं किया गया है।
मंत्र-साधना को अपनी परंपरा और सुविधा के अनुसार रखें। किसी विशेष दीक्षा या विस्तृत अनुष्ठान के लिए योग्य गुरु या आचार्य से मार्गदर्शन लें।